دوبیتی های سوگ همسر -46
بسمۀ تعالی
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دوبیتی های سوگ همسر -46
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ندارم کسی تا بگویم بر او نباشد که همسر کنم گفتگو
به خلوت به روحش شوم رو به رو از او من بخواهم کنم جستجو
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به پایان نگیرد ز همسر کلام ز من بوده باشد بر او هم سلام
دلم موج خون دارد همراه خود کجا غصّه ام را برد هر کدام
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مرا دفتر پر است از شعر مرغوب دلم شادست که دشمن گشته مرعوب
هم آنانی که بودند در تمسخر هم اکنون گشته اند یاران محبوب
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کند نرم و شعرم، دل سنگ را کند شادی از آن، دل تنگ را
ز احساس باشد نشیند به دل کند نرم در کلّ، دل هنگ را
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بیاد همسرخودمی زنم برسینه وبرسر مراهست آه وافسوسیِّ واشک ازدیدۀ تر
ازاو سئوال کنم من چه شدکه رفتی تو مرا به تو خبری شد، نگفته ای همسر
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دلم ز رفتن تو سوخت من که راگویم برای تسلیت خود چه چاره را جویم
تلاطم است درونم، ندیده ای آن را چه چاره ای بنمایم، که را همی پویم
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هزار مال و منالم دگر ندارد سود شود تلاطم دل راسکون، که آنرا بود
دلم چو سرکه بجوشد، فغان کند هردم کِه را کنم به تو تأیید، برآورد کمبود
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دلی که سوخت نگیرد بر آن دگر مرهم کباب گشته ز بس غم رسیده است بر غم
شفا فقط ز خدا باد، گرکه خواهد او به هر دلی بنماید اثر به قدری هم
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شفای عاجل او می شود بسنده مرا که پای تا به سرم را دوا کند هر جا
غمی زدل به که مانَد،و آه سینه کجا شفای او است، که غم می رود نظردرگاه
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به دل درد است و چشمان آب دیده جگر سوز است و آهی هست سینه
ز هجر یار باشد این پدیده خدا یا طاقتم بر حدّ رسیده
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خدا یا همسرم حاجت روا شد به هر درد و غمی، یکدم دوا شد
نبودش گر شفا در عزم و تصمیم به دنیای دگر او رهنما شد
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تو را باشد یقین جائی به دلخواه دلت گیرد در آن جا هر چه سکنا
نبودت گر تو را جائی در این جا تو را نیکو مکان گردد به عقبی
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دعایم این بُوَد گردی تو محشور به زهرا و پیمبر هست مقدور
تو عمری گفته ای زهرا و زینب توکّل بر خدا را هست میسور
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به بود او را به عمرش غوث و الغوث که بودش هر کجا الّله احساس
پناهش بر خدا بوده است و عبّاس به چشمش بوده از هر حلقه الماس
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روز چهار شنبه مورّخۀ 1399/11/29
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اينجانب عباس توكلي فرزند مرحوم كربلايي مهدي توكلي، مايل هستم از طريق اين وبلاگ، با اهالي روستاي كلاونگا، در جهت يادآوري آداب و رسوم (فرهنگي، اجتماعي، مذهبي) و آشنايي مجدد افراد با آنها، ارتباط برقرار نمايم. همچنين انتظار ميرود اهالي محترم در جهت نيل به عمران و آبادي روستا با اعضاي محترم شوراي اسلامي، همكاري بيش از پيش داشته باشند. بنابراين همت مضاعف و كار مضاعف همه دوستان را آرزومندم.