دو بیتی های سوگ همسر - 34
بسمۀ تعالی
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دو بیتی های سوگ همسر - 34
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تو را همسر به یاد آرم همیشه به تسبیح و نمازت بوده پیشه
دعا ها را فراوان خوانده بودی کمیل و جامعه از حدّ به بیشه
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تو ای همسر مرا وارسته بودی به درد و رنج خود، وابسته بودی
تو را غم های چندی آمده پیش به سوگ هر کدام آزرده بودی
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تسلّی دادمت در حدِّ امکان پذیرفتی ز من کردی تو اذعان
غم مادر پدر آمد تو را پیش تفاوت زآن بُوَد در بین انسان
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سه دائی، چهار عمّه آمده غم نبود از این همه غم ذرّه ای کم
تورا از هرکدام غم شدچو نشتر توراهم استخوان سوخت هم زپیکر
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عمو بوده تو را فخری به عالم به عزّت بر شمردی ز او دمادم
از آن خاله تو را بوده عزیزی که هر عضوی تو را سوزانده ماتم
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تو را بود سفره ها رنگین و زیبا بسی ساده، ولی بود دل فریبا
نبوده هر کجا آن رنگ و آن بو عجب طعمی عجب بوئی چه دلخواه
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تورا در باغیات سر رشته بوده به کشت و کار آن ها حیطه بوده
هویج و باقلا هر نوع حبوبات به داشت برداشتِ آن هم رشته بوده
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مرا یاد است کاشتی چند درختی به باغ خانه بود در فصل سختی
درخت بوده است تبریزی در آن جا تنومند شد، گذشته بیشتر از سی
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تو اندر بافتنی داشتی مهارت به هر کاری تو را بوده شجاعت
نترسیدی از آن، کردی تو دقّت به هر عضوی تو را بوده عنایت
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ز جوراب و ز دستکش تا که بولوز چنان عالی که بهتر از برون دوز
هر آن کس دیده بود، اندر تعجّب مگر امکان بود؟، ناری بیفروز
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تو را گفتم همسر در آن شام تار نباشد به دشمن مرا یک قرار
مرا هر چه هست، با همین دوستان که اندر حرم بوده اند پاسدار
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مرا هر درد و رنج بیچاره کرده غم همسر مرا آواره کرده
در این آوارگی رفتم به هر سو ولیکن روح من را خسته کرده
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دویدم تا که یابم چاره ای را نجستم چاره را، در ماندگی را
مرا درماندگی از پا در آورد که زحمت شد، کنم من بندگی را
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تو را بود ذکر لب هر دم دعائی هر آنچه خواسته ای ورد و ثنائی
ز اشک دیدگانت بوده احساس توسّل کرده ای هر دم خدائی
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روز جمعه مورّخۀ 17/11/ 1399
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اينجانب عباس توكلي فرزند مرحوم كربلايي مهدي توكلي، مايل هستم از طريق اين وبلاگ، با اهالي روستاي كلاونگا، در جهت يادآوري آداب و رسوم (فرهنگي، اجتماعي، مذهبي) و آشنايي مجدد افراد با آنها، ارتباط برقرار نمايم. همچنين انتظار ميرود اهالي محترم در جهت نيل به عمران و آبادي روستا با اعضاي محترم شوراي اسلامي، همكاري بيش از پيش داشته باشند. بنابراين همت مضاعف و كار مضاعف همه دوستان را آرزومندم.